जियोथर्मल ऊर्जा वैश्विक स्तर पर नया जोश प्राप्त कर रही है। यह नया रुझान तकनीकी प्रगति और डेटा सेंटर्स जैसी स्थिर ऊर्जा स्रोतों की बढ़ती आवश्यकता के कारण है। एक प्रतिनिधि उदाहरण यूनाइटेड डाउन्स प्लांट है कॉर्नवाल, यूनाइटेड किंगडम में, जो न केवल बिजली उत्पन्न करता है, बल्कि जियोथर्मल द्रव से लिथियम भी निकालता है। यह तकनीक एक स्थिर आधार विकल्प प्रदान करती है, जिसमें कम भूमि पदचिह्न है।
गहरे कुओं की तकनीक और खनिज पुनर्प्राप्ति ⚙️
कॉर्नवाल का प्रोजेक्ट गहरे कुओं पर आधारित है, जो गर्म चट्टानों तक पहुंचकर उच्च तापमान का पानी निकालते हैं। इस द्रव का उपयोग बाइनरी चक्र के माध्यम से बिजली उत्पन्न करने के लिए किया जाता है। मुख्य नवाचार बाद की प्रक्रिया में है: वही जियोथर्मल द्रव, जो पहले ऊर्जा के लिए उपयोग किया गया है, अब प्राकृतिक रूप से घुले लिथियम को पुनर्प्राप्त करने के लिए उपचारित किया जाता है। यह दोहरे उपयोग का दृष्टिकोण प्रोजेक्ट की आर्थिक व्यवहार्यता को बेहतर बनाता है, जो शुरू में सार्वजनिक सब्सिडी से समर्थित था।
जब आपकी बैटरी भूमिगत सौना से आती है 😲
यह सोचकर आश्चर्य होता है कि भविष्य की बैटरियों का लिथियम इतना अनोखा मूल हो सकता है। जबकि हम उपकरण चार्ज करते हैं, भूमि के कई किलोमीटर नीचे गर्म द्रव भारी काम करता है, खनिजों को घोलता है और पंप होने देता है। ऐसा लगता है कि पृथ्वी, हमें गर्म करने और ऊर्जा देने के अलावा, अब हमें अपनी नमक भी उधार दे रही है ताकि हम बिना रुके स्क्रॉल करते रहें। एक लगभग काव्यात्मक चक्र, अगर यह न होता कि इसका मतलब है कि अब भूमिगत भी मल्टीटास्क मोड में है।