स्कूल की बदमाशी अब स्क्रीन पर आ गई है, और डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म दूसरी ओर देख रहे हैं। हर दिन, हजारों बच्चे सोशल मीडिया पर हमलों का शिकार होते हैं, जबकि एल्गोरिदम समय पर कार्रवाई नहीं करते। इसका समाधान शिष्टाचार की मांग करना नहीं है, बल्कि भारी जुर्माना लगाना है जो कंपनियों को हुए नुकसान के लिए अपनी कानूनी जिम्मेदारी लेने के लिए मजबूर करे।
सामग्री को रीयल-टाइम में मॉडरेट करने के लिए AI फ़िल्टर 🤖
वर्तमान तकनीक कृत्रिम बुद्धिमत्ता प्रणालियों को लागू करने की अनुमति देती है जो संदेशों, छवियों और वीडियो में बदमाशी के पैटर्न का पता लगाती हैं। ये फ़िल्टर भाषा, बातचीत की आवृत्ति और उपयोगकर्ता रिपोर्ट का विश्लेषण कर सकते हैं ताकि सेकंडों में हानिकारक सामग्री को ब्लॉक किया जा सके। यदि कंपनियां इन संसाधनों को लागू करें, तो वे नुकसान होने से पहले बदमाशी को कम कर सकती हैं। कुंजी उन्हें आर्थिक दंड के माध्यम से इन प्रणालियों में निवेश करने के लिए मजबूर करना है।
एल्गोरिदम जो कुछ नहीं देखता, लेकिन सब कुछ बिल करता है 💸
वही एल्गोरिदम जो आपको स्नीकर्स का सही विज्ञापन दिखाते हैं, वे बार-बार किए गए अपमान का पता लगाने में सक्षम नहीं हैं। कितना अजीब है: कृत्रिम बुद्धिमत्ता सेकंडों में पिज़्ज़ा के ऑफ़र ढूंढ लेती है, लेकिन एक बदमाश की पहचान करने के लिए विद्वानों की एक समिति की आवश्यकता होती है। यदि जुर्माना आता है, तो निश्चित रूप से तकनीक और अधिक स्मार्ट हो जाएगी। शायद वह बिल आने से पहले ही नफरत के संदेशों को पढ़ना भी सीख जाए।