डेविड फर्नांडीज अपने लेख अंतिम हमला में लोकतंत्र की स्थिति का निदान प्रस्तुत करते हैं, यह संकेत देते हुए कि सत्तावादी प्रगति कोई अचानक विस्फोट नहीं है बल्कि वर्षों के संस्थागत क्षरण का परिणाम है। लेखक बताता है कि कैसे नफरत और गलत सूचना के भाषण सामान्य हो गए हैं, जो एक ऐसे बिंदु पर पहुंच गए हैं जहां से वापसी संभव नहीं है, जहां लोकतांत्रिक मूल्यों पर बिना किसी छिपाव के हमला किया जा रहा है।
प्रौद्योगिकी कैसे लोकतांत्रिक संतुलन के क्षरण को तेज करती है 🤖
फर्नांडीज बताते हैं कि डिजिटल प्लेटफॉर्म इस संकट के त्वरक के रूप में काम कर रहे हैं। एल्गोरिदम ध्रुवीकरण करने वाली सामग्री को प्राथमिकता देते हैं, गलत सूचना को बढ़ाते हैं और सार्वजनिक बहस को कमजोर करते हैं। इस बीच, बॉट और डीपफेक जैसे उपकरण जनमत को बड़े पैमाने पर हेरफेर करने की अनुमति देते हैं। इन स्थानों में प्रभावी नियमन की कमी ने एक ऐसा वातावरण तैयार किया है जहां शोर तथ्यों पर हावी हो जाता है, और सत्यापन प्रणालियाँ गति बनाए रखने के लिए संघर्ष करती हैं।
समाधान: एक बॉट जो आपके लिए वोट करे और आपको औपचारिकता से बचाए 🗳️
इस परिदृश्य के मद्देनजर, कुछ लोग सुझाव देते हैं कि अगली लोकतांत्रिक क्रांति में एक AI सहायक शामिल होना चाहिए जो फर्जी खबरों को फ़िल्टर करे और साथ ही हमारा वोट डाले। इस तरह, जब हम Netflix देखते हैं, तो एल्गोरिदम हमारे लिए निर्णय लेता है। आखिरकार, अगर बॉट पहले से ही जनमत में हेरफेर कर रहे हैं, तो उन्हें बैलेट क्यों नहीं सौंप दें? कम कतारें, अधिक दक्षता, और एक ऐसी प्रणाली जो कम से कम ऑटोपायलट पर काम करती है।