यूक्रेन में ड्रोनों की संतृप्ति एक महत्वपूर्ण बिंदु पर पहुँच गई है। सैनिक अब अपने और दुश्मन के उपकरणों के बीच अंतर नहीं कर पाते, जिससे लगातार मैत्रीपूर्ण आग लगती रहती है। ऑपरेटर बिना यह जाने कि वे कहाँ से आए हैं, फाइबर ऑप्टिक केबल काट देते हैं, और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध अपने ही संकेतों को अवरुद्ध कर देता है, जिससे युद्धक्षेत्र तकनीकी और सामरिक अराजकता में बदल जाता है।
प्रौद्योगिकी जो उपयोगकर्ता के विरुद्ध हो जाती है 🛡️
इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणालियाँ एक दोधारी तलवार बन गई हैं। स्पेक्ट्रम को संतृप्त करके, वे दोनों पक्षों के संचार को अवरुद्ध कर देती हैं, जिससे इकाइयाँ बिना संपर्क के रह जाती हैं। फाइबर ऑप्टिक ड्रोन, जो हस्तक्षेप से बचने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं, तब आसान लक्ष्य बन जाते हैं जब केबल गलती से काट दिए जाते हैं। मित्र-शत्रु पहचान विफल हो जाती है, और ऑपरेटर विस्फोट का जोखिम उठाने के बजाय किसी भी ड्रोन को मार गिराना पसंद करते हैं।
उलझनों का ड्रोन: सब गोली चलाते हैं, कोई निशाना नहीं लगाता 🎯
यह स्थिति एक पेंटबॉल खेल की याद दिलाती है जहाँ सभी एक ही वर्दी पहनते हैं। यूक्रेनी सैनिकों ने अपने ड्रोनों को अलग पहचानने के लिए पीले टेप से रंगना शुरू कर दिया है, लेकिन रूसी भी लाल टेप से ऐसा ही करते हैं। परिणाम: पूर्ण भ्रम और अपने ही पक्ष द्वारा मार गिराया गया एक-दो ड्रोन। इस बीच, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध दूर से ऑपरेटरों के रिमोट कंट्रोल को भी अवरुद्ध करके हँसता रहता है।