गूगल ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता खोज के लिए वेबसाइटों को अनुकूलित करने के लिए अपनी पहली आधिकारिक मार्गदर्शिका प्रकाशित की है, साथ ही GEO और AEO के कथित ट्रिक्स को भी खारिज कर दिया है। गूगल सर्च सेंट्रल में शामिल यह दस्तावेज़ बताता है कि AI में रैंक करना केवल पारंपरिक SEO करना है। यदि कोई सामग्री क्लासिक परिणामों के लिए पात्र नहीं है, तो वह AI Overviews या AI Mode के लिए भी पात्र नहीं होगी।
रैंकिंग सिस्टम नहीं बदलते, बस अपडेट होते हैं 🤖
गाइड में विस्तार से बताया गया है कि सर्च इंजन के AI फीचर्स क्लासिक सर्च के समान कोर रैंकिंग और गुणवत्ता सिस्टम पर आधारित हैं। इसका मतलब है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता के लिए ऑप्टिमाइज़ेशन तकनीकें, जैसे एंटिटी मार्किंग या जनरेटेड उत्तरों के लिए विशिष्ट फ़ॉर्मेटिंग, का कोई प्रभाव नहीं पड़ता यदि सामग्री E-E-A-T और प्रासंगिकता के पारंपरिक मानदंडों को पूरा नहीं करती। गूगल का कहना है कि AI द्वारा जनरेट किए गए सारांश केवल वही सामग्री दिखाते हैं जो पारंपरिक खोज परिणामों में पहले से दिखाई देती, जिससे कोई शॉर्टकट खत्म हो जाता है।
GEO के जादुई औषधि को अलविदा 💥
तो वे सभी गुरु जो GEO और AEO के गुप्त अमृत को बेच रहे थे, उन्हें माउंटेन व्यू से सीधे ठंडा पानी मिल गया है। पता चला कि AI के उत्तरों में दिखने का ट्रिक 200 यूरो का प्लगइन या छिपे कीवर्ड वाला कोई गुप्त फॉर्मूला नहीं था। यह वही पुरानी बात थी: उपयोगी सामग्री लिखना और गूगल को उसे समझने देना। वाह, किसने सोचा था। अब ग्राहकों को यह समझाने की बारी है कि गूगल ट्रांसलेट से अनुवादित टेक्स्ट वाली उनकी ड्रॉपशिपिंग वेबसाइट न तो AI में और न ही कहीं और दिखाई देगी।