दिल्ली एनसीआर में संपीड़ित प्राकृतिक गैस की कीमत में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। मध्य पूर्व में अस्थिरता और वैश्विक ऊर्जा की बढ़ती कीमतों का सीधा असर टैक्सियों और ऑटो रिक्शा पर पड़ रहा है। इस ईंधन पर निर्भर चालक देख रहे हैं कि उनकी परिचालन लागत दिन-ब-दिन बिना रुके बढ़ रही है।
दबाव में गैस इंजन: तकनीकी चुनौती 🔧
दिल्ली एनसीआर में सीएनजी वाहनों का बेड़ा इंजेक्शन सिस्टम पर काम करता है, जिसके लिए 200 से 250 बार के भंडारण दबाव की आवश्यकता होती है। गैस की बढ़ती कीमत प्रति किलोमीटर यात्रा को महंगा बना रही है, जिससे चालकों को मार्ग बदलने और निष्क्रिय समय कम करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। रूपांतरण किट, हालांकि कुशल हैं, लेकिन अस्थिर बाजार में ईंधन की लगातार बढ़ती कीमतों की भरपाई नहीं कर पाती हैं।
वह बचत जो धुएँ के बादल में उड़ गई 💨
चालक एक अतिरिक्त चाय के लिए बचत करने का सपना देख रहे थे, लेकिन अब गैस उन्हें लगभग पेट्रोल जितनी ही महंगी पड़ रही है। कुछ लोग अब मीटर को उसी विश्वास से देख रहे हैं जैसे कोई भविष्यवक्ता हो। जल्द ही हम साइकिल से खींचे जाते ऑटो रिक्शा या चालकों को ट्रैफिक लाइट पर खर्चे पूरे करने के लिए चुटकुले बेचते देख सकते हैं।