चीन ने पुष्टि की है कि पानी के नीचे डेटा सेंटर विज्ञान कथा नहीं, बल्कि एक ठोस व्यावसायिक दांव हैं। हैनान में स्थापना पहले से ही व्यावसायिक रूप से काम कर रही है, जबकि शंघाई में एक मॉड्यूल अपतटीय पवन ऊर्जा से संचालित होता है। इस पहल का उद्देश्य ऊर्जा की खपत को कम करना और महासागर की प्राकृतिक शीतलन का लाभ उठाना है।
सर्वरों के लिए महासागरीय शीतलन और पवन ऊर्जा 🌊
तकनीकी अवधारणा सरल है: सर्वरों को समुद्र तल पर सीलबंद कंटेनरों में रखना। ठंडा पानी हवा की तुलना में अधिक कुशलता से गर्मी को नष्ट करता है, जिससे शीतलन में बिजली की खपत 40 प्रतिशत तक कम हो जाती है। शंघाई मॉड्यूल अपतटीय पवन टर्बाइनों के साथ मिलकर स्थिरता की एक परत जोड़ता है, जो साइट पर स्वच्छ ऊर्जा उत्पन्न करता है और स्थलीय बिजली ग्रिड पर निर्भरता से बचाता है।
डेटा सेंटर जो ऑक्टोपस या जंग से नहीं डरता 🐙
अब बस यह जरूरत है कि ऑक्टोपस केबलों को हैक करने का फैसला न करें या जंग सर्वरों के साथ कॉफी न पी ले। चीन ने साबित कर दिया है कि पानी में तकनीक डालना संभव है, हालांकि कोई सोचता है कि अगला कदम समुद्र तल पर राउटर स्थापित करना होगा ताकि शार्क से भागते समय मछलियों के पास बेहतर वाईफाई सिग्नल हो। कम से कम, अगर कुछ गलत होता है, तो हम हमेशा उस केकड़े को दोष दे सकते हैं जिसने फाइबर ऑप्टिक केबल को काटा।