वलाडोलिड BACSI परियोजना के साथ एक तकनीकी छलांग लगाने की तैयारी कर रहा है। नगर निगम, रक्षा मंत्रालय और वलाडोलिड विश्वविद्यालय ने विलानुब्ला वायु सेना बेस को रक्षा नवाचार की प्रयोगशाला में बदलने के लिए हाथ मिलाया है। इसका विचार संचालन, सुरक्षा में सुधार और पर्यावरणीय प्रभाव को कम करने के लिए सेंसर, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और उन्नत प्रणालियों को एकीकृत करना है।
सेंसर, AI और डेटा: सैन्य डिजिटलीकरण 🛰️
BACSI योजना बेस की गतिविधियों की वास्तविक समय में निगरानी करने के लिए सेंसर और कृत्रिम बुद्धिमत्ता एल्गोरिदम के एक नेटवर्क पर निर्भर करती है। इससे ऊर्जा खपत को अनुकूलित करना, हवाई यातायात का प्रबंधन करना और रखरखाव की जरूरतों का पूर्वानुमान लगाना संभव होगा। वलाडोलिड विश्वविद्यालय साइबर-भौतिक प्रणालियों और डेटा प्रबंधन में अपनी विशेषज्ञता प्रदान करेगा, जबकि रक्षा मंत्रालय सुविधाओं तक पहुंच प्रदान करेगा। उद्देश्य एक डिजिटलीकृत वातावरण बनाना है जो अन्य ठिकानों के लिए एक मॉडल के रूप में काम करे।
उड़ान भरते समय WiFi कनेक्शन न टूटे 😅
सब कुछ बहुत अच्छा है, लेकिन जब बेस डेटा और सेंसर के क्लाउड पर निर्भर होगा, तो उम्मीद है कि सिस्टम ठीक उसी समय अपडेट होने का फैसला नहीं करेगा जब कोई लड़ाकू विमान उतरने वाला हो। क्योंकि एक बात है कि आपका मोबाइल रीस्टार्ट हो जाए और दूसरी बात है कि रडार रीस्टार्ट हो जाए। कम से कम, अगर AI विफल हो जाता है, तो पायलट हमेशा पारंपरिक तरीके का सहारा ले सकते हैं: खिड़की से बाहर झाँककर देखना कि कोई दूसरा विमान आ रहा है या नहीं।