संविधान संरक्षण के संघीय कार्यालय के अध्यक्ष, सेलेन ने उपकरणों में घुसपैठ करने और AI के साथ चेहरे की पहचान का उपयोग करने के लिए विस्तारित शक्तियों का अनुरोध किया है। यह प्रस्ताव खतरों की रोकथाम को मजबूत करना चाहता है, लेकिन डेटा संरक्षण आयुक्त, क्रेमर ने चेतावनी दी है कि एजेंसी को एक सक्रिय खुफिया सेवा में बदलने से इसके मूल कार्य और पुलिस से अलगाव धुंधला हो जाता है।
डिजिटल निगरानी: दूरस्थ घुसपैठ और पूर्वानुमानित एल्गोरिदम 🕵️
सेलेन के अनुरोध में पूर्व सूचना के बिना कंप्यूटर और मोबाइल तक दूरस्थ पहुंच, साथ ही रीयल-टाइम चेहरे की पहचान प्रणाली और व्यवहार पैटर्न का विश्लेषण करने के लिए AI एल्गोरिदम का उपयोग शामिल है। ये तकनीकें, जो बाहरी खुफिया सेवाओं में आम हैं, देश के भीतर जर्मन नागरिकों पर लागू की जाएंगी। तकनीकी दृष्टिकोण से, इस उपाय का अर्थ एन्क्रिप्शन को तोड़ना और गोपनीयता सुरक्षा को दरकिनार करना होगा, जो इसकी वैधता और न्यायिक नियंत्रण पर सवाल उठाता है।
एक लंबे नाम वाली गुप्त पुलिस? 🤖
क्रेमर इसे स्पष्ट रूप से कहते हैं: कार्यालय कोई गुप्त पुलिस नहीं है, लेकिन नई शक्तियां इसे खतरनाक रूप से उसके करीब ला रही हैं। शायद अगला कदम इसका नाम बदलकर कुछ अधिक आकर्षक रखना हो, जैसे संघीय मैत्रीपूर्ण घरेलू जासूसी एजेंसी। इस बीच, जर्मन नागरिक सोच रहे हैं कि क्या उनकी अगली सेल्फी खुफिया डेटाबेस में समाप्त होगी, जिस पर बहुत अधिक मुस्कुराने के कारण संभावित जोखिम का लेबल लगा होगा।