अरमान संधू शटर स्टोरी प्रस्तुत करते हैं, एक मनोवैज्ञानिक हॉरर गेम जो हमें 2002 में वापस ले जाता है। पल्स जैसी तकनीकी अस्वस्थता वाली सिनेमा से प्रेरित, यह गेम अलौकिक भय की खोज करता है जो स्क्रीन और डिजिटल फोटोग्राफ्स के माध्यम से रिसता है। खिलाड़ी काल्पनिक सॉफ्टवेयर स्पेक्ट्रलअवेयर 2.1 का उपयोग करके अजीब घटनाओं की जांच करता है, छवियों को मैनिपुलेट करके उनमें छिपी चीजों को उजागर करता है।
स्पेक्ट्रलअवेयर 2.1: विज़ुअल टेरर का इंजन 👁️
मुख्य मैकेनिक स्थिर छवियों की मैनिपुलेशन के इर्द-गिर्द घूमती है। खिलाड़ी एक्सपोज़र, कंट्रास्ट, ब्राइटनेस और सैचुरेशन जैसे पैरामीटर्स को एडजस्ट करता है, या विशिष्ट फिल्टर्स लागू करता है, ताकि फोटो में छिपी विसंगतियों और इकाइयों को प्रकट कर सके। संधू जटिल छद्म-वैज्ञानिक स्पष्टीकरणों के बजाय सूक्ष्म हॉरर की वातावरण और 2000 के दशक की शुरुआत की तकनीक की सौंदर्यशास्त्र को प्राथमिकता देते हैं, CRT इंटरफेस से लेकर पिक्सेल नॉइज़ तक।
तुम्हारा नया स्क्रीनसेवर तुम्हें बुरे सपने देगा 👻
यह रोचक है कि गेम हमारी दैनिक दिनचर्या को भयानक अनुभव में कैसे बदल देता है: एक JPEG इमेज लोड होने का इंतजार करना, CRT मॉनिटर का गुनगुनाहट सुनना और एक सस्ते एडिटिंग प्रोग्राम के स्लाइडर्स एडजस्ट करना। अब, अपने चचेरे भाई की लाल आंखें ठीक करने के बजाय, तुम एक डिजिटल आत्मा को पृष्ठभूमि से तुम्हें घूरते हुए खोज सकते हो। नॉस्टैल्जिया दर्द देता है, लेकिन डर इससे भी ज्यादा।