चिली में वेरा सी. रुबिन वेधशाला ने अब तक ज्ञात सबसे तेज़ घूमने वाले क्षुद्रग्रह की पहचान की है। 2025 MN45 नामित यह व्यास में लगभग 710 मीटर का वस्तु हर 1.9 मिनट में एक चक्कर पूरा करता है। इस वेधशाला के प्रारंभिक डेटा में पता चली यह गति उस आकार के किसी पिंड के लिए असंभव मानी जाती थी। यह खोज इन आकाशीय पिंडों की संरचना और मजबूती को पुनर्विचार करने पर मजबूर करती है।
LSST की तकनीक: रिकॉर्ड समय में क्षुद्रग्रहों का शिकार 🚀
यह खोज रुबिन वेधशाला के एक दशक के कार्यक्रम लिगेसी सर्वे ऑफ स्पेस एंड टाइम (LSST) का प्रारंभिक परिणाम है। इसका 3,200 मेगापिक्सेल का कैमरा और 8.4 मीटर का दर्पण अभूतपूर्व आवृत्ति और गहराई के साथ आकाश को स्कैन करता है। हर कुछ रातों में आकाश के एक ही बिंदु की छवियां कैप्चर करके, सिस्टम न्यूनतम परिवर्तनों और अत्यंत तेज़ गतियों का पता लगा सकता है, जैसे 2025 MN45 की घूर्णन। प्रसंस्करण सॉफ्टवेयर इसके चमक में परिवर्तन के पैटर्न की पहचान करता है।
इतना तेज़ घूमना कि अंतरिक्ष यात्री को उल्टी हो जाए 🤢
यदि किसी को 2025 MN45 पर उतरने का बिल्कुल अनुशंसित न होने वाला विचार आ जाए, तो अनुभव संक्षिप्त और चक्कर भरा होगा। इस वाक्य को पढ़ने के समय में, क्षुद्रग्रह कई पूर्ण चक्कर लगा चुका होगा। इसकी सतह पर अपकेंद्रीय बल इतना तीव्र होगा कि कोई भी लैंडिंग मॉड्यूल, या यहां तक कि कोई ढीली चट्टान, अंतरिक्ष में उछल जाएगी। लगता है यह क्षुद्रग्रह तेज़तर, मजबूत के नारे को बहुत गंभीरता से ले लिया।