एक जापानी प्रौद्योगिकी वाला वैज्ञानिक प्रोजेक्ट ने इस्तांबुल के पास समुद्री तल को तीन आयामों में मानचित्रित किया है। उद्देश्य इस उच्च टेक्टोनिक गतिविधि वाले क्षेत्र में भूवैज्ञानिक दोषों का विस्तार से विश्लेषण करना है। प्राप्त डेटा जोखिम मॉडलों को परिष्कृत करने और रोकथाम प्रणालियों को सुधारने की अनुमति देगा। शोधकर्ताओं का कहना है कि यह एक नियमित अध्ययन कार्य है और तत्काल चिंता का विषय नहीं है।
मल्टीबीम सोनार प्रौद्योगिकी और 3D मॉडलिंग छिपी हुई दोषों को उजागर करने के लिए 🔍
प्रयुक्त तकनीक उच्च रिज़ॉल्यूशन वाले मल्टीबीम सोनार पर आधारित है जो नौकाओं पर लगाए गए हैं। ये उपकरण ध्वनि किरणों का एक पंखा उत्सर्जित करते हैं जो समुद्री तल से टकराते हैं, इसकी गहराई और टोपोग्राफी को सटीकता से मापते हैं। डेटा को तीन आयामी मॉडल उत्पन्न करने के लिए संसाधित किया जाता है जो फ्रैक्चर, फोल्ड्स और अन्य भूवैज्ञानिक संरचनाओं को प्रकट करते हैं। यह विस्तार स्तर सक्रिय दोषों की पहचान करने और उनके भूकंपीय गतिविधि उत्पन्न करने की क्षमता का मूल्यांकन करने में मदद करता है।
पृथ्वी की कोई गोपनीयता नहीं: इसकी सबसे गुप्त दरारें भी स्कैन की जा रही हैं 😳
लगता है कि ग्रह का कोई कोना स्कैनर से सुरक्षित नहीं बचा। पहले सड़क मानचित्र थे, फिर हमारे आंगन की हवाई दृष्टि और अब समुद्र के नीचे छिपी दरारें भी 3D में उजागर की जा रही हैं। ऐसा लगता है जैसे पृथ्वी की परत एक स्थायी भूवैज्ञानिक जांच में हो, जहां भूवैज्ञानिक डॉक्टर हैं जो मुझे दिखाएं कि आपको कहां दर्द हो रहा है कहते हैं। कम से कम, इन जांचों से, शायद वे हमें अचानक खिंचाव से पहले चेतावनी दें।