पर्ड्यू विश्वविद्यालय की एक टीम अंतरिक्ष में पाउडर-आधारित 3D प्रिंटिंग का उपयोग करने का प्रस्ताव रखती है। विचार स्थानीय सामग्रियों, जैसे चंद्रमा का रेगोलिथ या पुराने उपग्रहों के अवशेषों का उपयोग करना है, ताकि पृथ्वी से सब कुछ भेजने के भारी खर्च से बचा जा सके। इससे चंद्रमा या कक्षा में सीधे आवास और उपकरणों का निर्माण संभव हो सकेगा।
माइक्रोग्रैविटी में पाउडर्स के हैंडलिंग की चुनौती 🚀
पृथ्वी की तकनीक अंतरिक्षीय स्थितियों के लिए तैयार नहीं है। माइक्रोग्रैविटी या चंद्रमा पर, बारीक कणों जैसे रेगोलिथ के बीच चिपकाव की शक्तियाँ प्रमुख हो जाती हैं। इससे पाउडर का प्रवाह पूरी तरह बदल जाता है, जिससे प्रिंटिंग सिस्टम में सक्लंपिंग और रुकावटें हो जाती हैं। इस व्यवहार को नियंत्रित करने के लिए उपकरणों को अनुकूलित करना मुख्य तकनीकी बाधा है।
जब आपकी 3D प्रिंटर को स्पेस का वैक्यूम पसंद हो 🛰️
लगता है कि maker का अगला बड़ा समस्या बेड कैलिब्रेट करना नहीं होगा, बल्कि प्रिंटिंग सामग्री को तैरते हुए भागने और विद्रोही धूल के बादल बनाने से रोकना होगा। कल्पना करें कि स्पेस सूट पहनकर hotend को साफ कर रहे हैं, जबकि एक रेगोलिथ का गुच्छा मॉड्यूल के कोने से आपको घूर रहा है। फिलामेंट जाम से एक बड़ा गुणात्मक छलांग।