युवा कलाकार एजेंटों के संघ ने आरोप लगाया है कि हैस्ब्रो पेप्पा पिग के बाल अभिनेताओं से भविष्य में बिना किसी मुआवजे के कृत्रिम बुद्धिमत्ता को प्रशिक्षित करने के लिए अपनी आवाज़ की रिकॉर्डिंग सौंपने की मांग करता है। इसका मतलब है कि नाबालिग अपनी आय और अपनी प्रतिभा पर नियंत्रण खो देते हैं, जबकि कंपनी उत्पादन लागत कम करती है। यह एक ऐसी प्रथा है जो मनोरंजन उद्योग में बुनियादी श्रम अधिकारों को खतरे में डालती है।
कैसे AI बिना रॉयल्टी दिए आवाज़ों का क्लोन बनाता है 🎤
तकनीकी प्रक्रिया सरल है: हैस्ब्रो बाल अभिनेताओं के मूल संवादों के सैकड़ों घंटे एकत्र करता है ताकि वॉयस सिंथेसिस मॉडल को फीड किया जा सके। न्यूरल नेटवर्क पर आधारित ये AI सिस्टम नई रिकॉर्डिंग की आवश्यकता के बिना स्वर, लहजा और भावना को दोहराना सीखते हैं। कंपनी नाबालिग को काम पर रखे बिना एपिसोड, वीडियो गेम या खिलौनों के लिए नई संवाद पंक्तियाँ उत्पन्न कर सकती है। इसका परिणाम वेतन और रॉयल्टी में बचत है, लेकिन मूल प्रतिभा अपनी डिजिटलीकृत आवाज़ पर नियंत्रण खो देती है।
वह दिन जब पेप्पा पिग ने नाश्ते के पैसे दिए बिना बात की 🐷
तो अब आप जान गए हैं: यदि आपका बच्चा गुलाबी सुअर बनने का सपना देखता है, तो बेहतर होगा कि वह घर पर ही रिकॉर्ड करे और फ़ाइलों पर ताला लगा दे। क्योंकि अब हैस्ब्रो चाहता है कि बच्चे हमेशा के लिए अपनी आवाज़ उधार दें, जैसे पुस्तकालय से उधार ली गई किताब जो कभी वापस नहीं की जाती। अगली बार जब पेप्पा चिल्लाएगी मैं पोखरों में कूदना चाहती हूँ, तो शायद यह एक AI धोखा दे रहा होगा, जबकि मूल अभिनेता स्कूल में भाग करना सीख रहा होगा। पूरा फायदे का सौदा, है ना?