Apple ने अपने एंट्री-लेवल लैपटॉप को MacBook Neo 2 के साथ रिफ्रेश किया है, जो RAM को 12 GB तक बढ़ाता है और AI कार्यों के लिए प्रोसेसर को बेहतर बनाता है। कंपनी कई ऐप्स और लोकल मॉडल चलाने पर सहजता का वादा करती है। हालांकि, असहज सवाल बना हुआ है: जब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का युग शुरू हो रहा था, तो मूल मॉडल 8 GB के साथ क्यों लॉन्च किया गया?
12 GB की छलांग: तकनीकी आवश्यकता या व्यावसायिक रणनीति 🤔
Apple की नई M3 चिप भाषा मॉडल और जनरेटिव AI टूल्स को अधिक आसानी से चलाने में सक्षम बनाती है। 12 GB की यूनिफाइड RAM मूल Neo के 8 GB की तुलना में उपलब्ध बैंडविड्थ को दोगुना कर देती है, जिससे SSD पर स्वैप पर निर्भरता कम हो जाती है। यह आंकड़ा आकस्मिक नहीं है: यह न्यूनतम मात्रा है जो Microsoft Windows पर Copilot+ के लिए मांगता है, और वही मात्रा जिसे Apple ने 2023 में अपनी लो-एंड रेंज में मार्जिन बनाए रखने के लिए टाला था।
टिम कुक और कालीन के नीचे छिपी RAM 😅
Apple हमें 12 GB इस तरह बेच रहा है जैसे उसने पेनिसिलिन की खोज कर ली हो, जबकि कोई भी उपयोगकर्ता जानता था कि 2024 में 8 GB गुलेल के साथ युद्ध में जाने जैसा था। कंपनी के पास एक गुप्त विभाग होना चाहिए जहां वे बची हुई RAM को रखते हैं ताकि इसे हर दो साल में एक बड़ी उपलब्धि के रूप में लॉन्च किया जा सके। अगला मील का पत्थर: MacBook Neo 3 16 GB के साथ आएगा और वे इसे क्वांटम क्रांति कहेंगे।