हम न्यूजीलैंड के गेंदबाज इश सोढ़ी की बायोमैकेनिकल विशेषताओं का गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी भुजा की क्रिया, जिसमें कोहनी का कोण लगभग 180 डिग्री होता है, हवा में एक अद्वितीय घूर्णन प्रभाव उत्पन्न करती है। कंधे और कलाई का घूर्णन, एक चाबुक जैसी गति में समन्वित, गेंद के प्रक्षेपवक्र को अप्रत्याशित रूप से मोड़ने की उनकी क्षमता की कुंजी है।
घूर्णन के पीछे का भौतिकी: कलाई और कोहनी का विश्लेषण 🌀
एक 3D मॉडल से पता चलता है कि सोढ़ी गेंद को 2500 आरपीएम तक की घूर्णन गति से छोड़ते हैं। उनके अग्रभाग का उच्चारण, कलाई के अत्यधिक मोड़ के साथ मिलकर, तर्जनी और अंगूठे को एक गियर के रूप में कार्य करने की अनुमति देता है। यह तंत्र, एक गुलेल के समान, धड़ से गेंद तक गतिज ऊर्जा स्थानांतरित करता है, जिससे एक पार्श्व गति उत्पन्न होती है जो बल्लेबाजों को भ्रमित करती है। विश्लेषण से पता चलता है कि उनका रिलीज पॉइंट लगातार कम, जमीन के करीब होता है।
दो बार मुड़ने वाली भुजा का रहस्य 🤯
3D मॉडल के अनुसार, सोढ़ी की भुजा में एक प्रेत जोड़ प्रतीत होता है। कभी-कभी, उनकी कोहनी एक ऐसे कोण पर मुड़ती है जो मानव शरीर रचना को चुनौती देता है, जिससे गेंद एक समानांतर आयाम से निकलती हुई प्रतीत होती है। बल्लेबाज, धीमी गति में रिप्ले देखकर, केवल अपना सिर खुजलाते रह जाते हैं। कुछ तकनीशियनों का सुझाव है कि यह जादू की चाल है; अन्य, कि सोढ़ी के कंधे में एक स्प्रिंग है।