OpenAI ने GPT-Rosalind का विस्तार किया है, जो फार्मास्युटिकल अनुसंधान के लिए उनका कृत्रिम बुद्धिमत्ता मॉडल है, जो अब जैव-रक्षा के क्षेत्र में प्रवेश कर चुका है। अब सरकारें और जैव-सुरक्षा स्टार्टअप इस उपकरण तक पहुँच सकते हैं, जो जैविक अनुक्रमों की भविष्यवाणी करता है और महामारियों से निपटने के लिए प्रयोगों को डिज़ाइन करता है। यह एक वैज्ञानिक प्रगति है जिसके दो बहुत स्पष्ट पहलू हैं।
मॉडल जीवन की भाषा कैसे पढ़ता है 🧬
GPT-Rosalind एक जैविक कोड अनुवादक की तरह काम करता है। यह प्रोटीन और न्यूक्लिक एसिड में पैटर्न का विश्लेषण करता है ताकि यह अनुमान लगा सके कि एक वायरस कैसे उत्परिवर्तित होगा या कौन सी दवा इसे बेअसर कर सकती है। इन सिलिको प्रयोगों को डिज़ाइन करने की इसकी क्षमता अनुसंधान को गति देती है, जिससे बिना टेस्ट ट्यूब को छुए परिकल्पनाओं का परीक्षण संभव होता है। सटीकता उच्च है, लेकिन प्रशिक्षण डेटा पर निर्भरता अज्ञात परिदृश्यों में इसकी पहुँच को सीमित करती है।
वह प्रतिभा जो अपना खुद का खलनायक बना सकता है 🦠
अब बस इतना बाकी है कि मॉडल यह जाँचने के लिए पोकेमॉन नाम का एक वायरस बनाने का फैसला करे कि क्या सरकारें फिट हैं। क्योंकि अगर विज्ञान कथा ने हमें कुछ सिखाया है, तो वह यह है कि एक एआई को बिना पैनिक बटन के आणविक जीव विज्ञान तक पहुँच देना, एक हिचकी वाले बच्चे को माचिस की डिब्बी देने जैसा है। उम्मीद है कि सुरक्षित मोड में एक ताला शामिल होगा।