नई राजधानियाँ बनाने का राजनीतिक समझौता देश को आधुनिक बनाने का वादा करता है, लेकिन यह दो वास्तविकताओं से टकराता है: युवाओं के लिए किफायती आवास एक मिथक है और ग्रामीण क्षेत्र तेजी से खाली हो रहे हैं। इन समस्याओं को नजरअंदाज करते हुए मेगा शहरी परियोजनाओं पर धन खर्च करना एक वास्तविक समाधान के बजाय एक चुनावी इशारा लगता है।
बिना निवासियों के स्मार्ट शहर: तकनीकी भ्रम 🏙️
इन नई राजधानियों की योजना स्मार्ट बुनियादी ढांचे, 5G नेटवर्क और टिकाऊ इमारतों पर केंद्रित है। हालांकि, अगर जमीन की कीमतें आसमान छू रही हैं तो कोई भी सेंसर या एल्गोरिदम खरीदारों की कमी को हल नहीं करेगा। प्रत्येक निवेशित येन को क्षेत्रीय पुनरुद्धार योजनाओं और किराए की सीमाओं से जोड़ना एक खाली शहर को टच स्क्रीन से भरने से अधिक प्रभावी होगा।
मास्टर प्लान: एक और शहर बनाना जिसे कोई नहीं खरीद सकेगा 💸
रणनीति शानदार है: सार्वजनिक धन को कांच के गगनचुंबी इमारतों पर खर्च करना, जबकि गांवों में सुपरमार्केट बंद हो रहे हैं और पड़ोसियों को उंगलियों पर गिना जा सकता है। इस तरह, युवा या तो नई राजधानी में एक असंभव बंधक चुन सकते हैं या दादा-दादी का घर एक ऐसे गांव में विरासत में ले सकते हैं जहां सबसे छोटा पड़ोसी 80 साल का है। यह एक बड़ी सफलता है।