यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की ने रूसी क्षेत्र में युद्ध के मोर्चे से सैकड़ों किलोमीटर दूर तेल डिपो और पंपिंग स्टेशनों के खिलाफ नए लंबी दूरी के हमलों की पुष्टि की है। उनके बयानों के अनुसार, यह आक्रामक मॉस्को द्वारा युद्ध को लम्बा खींचने के चुनाव का सीधा जवाब है। नागरिकों के लिए, इस वृद्धि का मतलब है कि संघर्ष तेज हो रहा है और यह ईंधन की कीमतों और वैश्विक ऊर्जा स्थिरता को प्रभावित कर सकता है।
ड्रोन और मिसाइलें: ऊर्जा युद्ध का नया रसद 🔥
हमले तुप्से रिफाइनरी और ट्रांसनेफ्ट प्रणाली के पंपिंग स्टेशनों जैसे प्रमुख बुनियादी ढांचे पर केंद्रित हैं। यूक्रेन 700 किलोमीटर से अधिक दूर के लक्ष्यों को भेदने के लिए लंबी दूरी के ड्रोन और पालियानित्सिया जैसी स्वदेशी मिसाइलों का उपयोग करता है। इस रणनीति का उद्देश्य रूसी ईंधन आपूर्ति श्रृंखला को बाधित करना और उसकी रसद क्षमता को कम करना है। हालांकि, इन प्रणालियों की सटीकता सीमित बनी हुई है, और रिपोर्ट की गई क्षति स्थानीय स्रोतों के अनुसार भिन्न होती है।
पुतिन, रूस के आकस्मिक पर्यावरणविद् 🌍
इस बीच, मॉस्को में उन्हें खुश होना चाहिए: जलता हुआ हर तेल डिपो जलवायु समझौतों की आवश्यकता के बिना रूस के कार्बन पदचिह्न को कम करता है। ज़ेलेंस्की, अनजाने में, पूर्वी यूरोप का सबसे प्रभावी पर्यावरण कार्यकर्ता बन गया है। हाँ, अगर पेट्रोल की कीमत बढ़ती है, तो वे शिकायत न करें: यह एक ऐसे संघर्ष की कीमत है जो बिना युद्धविराम के संकेतों के फैल रहा है और जिसका बिल नागरिकों के हाथों में है।