अचिम केम्पफ के नेतृत्व में एक शोध टीम ने एक विधि प्रस्तुत की है जो क्वांटम अवस्थाओं को क्लोन करने की अनुमति देती है, जो क्वांटम भौतिकी के एक स्तंभ के खिलाफ प्रतीत होती है: नो-क्लोनिंग प्रमेय। कुंजी यह है कि प्रतियां एन्क्रिप्टेड रूप में उत्पन्न की जाती हैं। केवल एक ही को एक समय में डिक्रिप्ट किया जा सकता है और पढ़ा जा सकता है, जो प्रमेय के भावना को तकनीकी रूप से संरक्षित रखता है। यह प्रगति पहले से ही वास्तविक क्वांटम हार्डवेयर पर परीक्षण की जा चुकी है।
एक बार उपयोग का एन्क्रिप्शन और क्वांटम शोर: प्रक्रिया की तकनीकी आधार 🔐
यह तकनीक शुद्ध क्वांटम अवस्था को कॉपी नहीं करती, बल्कि कई एन्क्रिप्टेड प्रतियां उत्पन्न करती है। प्रत्येक कॉपी के साथ एक एक बार उपयोग की डिक्रिप्शन कुंजी जुड़ी होती है, जो सुनिश्चित करती है कि केवल एक ही पढ़ने योग्य संस्करण सक्रिय हो सके। यह प्रक्रिया क्वांटम शोर के अध्ययन से प्रेरित है, जो सामान्यतः जानकारी को खराब करता है, लेकिन यहां इसे नियंत्रित तरीके से उपयोग किया गया है। इससे बैकअप के लिए अतिरिक्तता बनाई जा सकती है बिना क्वांटम नियमों का उल्लंघन किए।
नो-क्लोनिंग प्रमेय कॉफी पी रहा है जबकि उसका बैकअप लिया जा रहा है ☕
प्रतीत होता है कि नो-क्लोनिंग प्रमेय, क्वांटम जानकारी का वह कठोर रक्षक, अधिक लचीला बनना सीख गया है। अब यह बैकअप कॉपी करने की अनुमति देता है, लेकिन शर्त के साथ कि वे ताले में बंद हों और केवल एक ही को एक समय में उपयोग किया जा सके। यह वैसा ही है जैसे गैरेज में दस कारें हों, लेकिन सभी के लिए एक ही कुंजी हो, हालांकि आप केवल एक ही चला सकें। क्वांटम भौतिकी के भी अपने कानूनी ट्रिक्स हैं।