
मॉस्को की अदालत ने पुष्टि की कि एप्पल को रूसी आविष्कारक को भुगतान नहीं करना है
रूसी न्यायपालिका ने आविष्कारक आर्टाशेस इकोनोमोव द्वारा प्रौद्योगिकी दिग्गज एप्पल के खिलाफ दायर बहु-अरब डॉलर की मांग को अंतिम रूप से खारिज करने की पुष्टि की है। यह न्यायिक फैसला एक लंबी कानूनी प्रक्रिया को समाप्त करता है। ⚖️
पेटेंट विवाद की उत्पत्ति
यह मामला तब शुरू हुआ जब इकोनोमोव ने पेटेंट दर्ज कराया जो आपातकालीन कॉल करने के लिए एक विशिष्ट फंक्शन वाले फोन के लिए था। वर्षों बाद, आविष्कारक ने घोषणा की कि उन्होंने अपनी तकनीक को एप्पल के अधिकारियों को समझाने के लिए क्यूपरटिनो की यात्रा की थी, जिन्होंने, उनके अनुसार, इसमें रुचि नहीं दिखाई।
विवाद के मुख्य बिंदु:- इकोनोमोव ने 2013 में अपना पेटेंट दर्ज कराया।
- 2015 में, उन्होंने एप्पल के अधिकारियों से अपने आविष्कार को प्रस्तुत करने के लिए मुलाकात का दावा किया।
- प्रौद्योगिकी कंपनी ने उस तकनीक को अपनाने या लाइसेंस लेने की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ाई।
न्यायपालिका जोर देती है कि एक विचार को पेटेंट कराना और इसे किसी कंपनी को प्रस्तुत करना स्वतः ही मुआवजे का अधिकार नहीं उत्पन्न करता।
न्यायिक फैसले का विश्लेषण
अदालत ने सभी सबूतों की जांच की और इकोनोमोव की मांग का समर्थन करने के लिए कोई कानूनी आधार नहीं पाया, जिन्होंने 300 अरब रूबल की मांग की थी। फैसला पुष्टि करता है कि एप्पल के आईफोन उपकरणों में पेटेंट की गई तकनीक के उपयोग को साबित नहीं किया जा सका।
फैसले के केंद्रीय तर्क:- रूसी आविष्कारक के पेटेंट के उपयोग का एप्पल द्वारा कोई प्रमाण नहीं है।
- केवल पेटेंट होना ही मुआवजे का अधिकार नहीं देता यदि कोई अन्य कंपनी इसका उपयोग न करे।
- समान कार्यक्षमता को विभिन्न कंपनियां स्वतंत्र रूप से विकसित कर सकती हैं।
मामले का निष्कर्ष
यह न्यायिक फैसला बौद्धिक संपदा संबंधी दावों की सीमाओं पर एक मिसाल कायम करता है। यह प्रमाणित उपयोग न करने के प्रमाण की आवश्यकता पर जोर देता है, केवल पेटेंट रखने और इसे दिखाने से परे। रूसी न्यायपालिका का मानना है कि विचारों की चोरी नहीं हुई। 🛡️