एयरबस वायर-डेड प्रौद्योगिकी से बड़े टाइटेनियम के पुर्जे बना रहा है

2026 February 08 | स्पेनिश से अनुवादित
Imagen de un gran componente estructural de titanio fabricado mediante tecnología wire‑DED, mostrando el proceso de deposición capa por capa en una instalación industrial de Airbus.

एयरबस वायर-डीईडी प्रौद्योगिकी के साथ बड़े टाइटेनियम के टुकड़े बनाता है

विमानन कंपनी एयरबस एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग का एक उन्नत तरीका लागू कर रही है ताकि उत्पादित कर सके काफी बड़े आकार के टाइटेनियम संरचनात्मक घटकों को। यह तकनीक, जिसे वायर-डीईडी के नाम से जाना जाता है, विमान के सबसे बड़े हिस्सों को कैसे बनाया जाता है, इसमें महत्वपूर्ण प्रगति का प्रतिनिधित्व करती है। 🛩️

परत दर परत निर्माण प्रक्रिया

वायर-डीईडी सिस्टम चयनात्मक रूप से सामग्री जमा करके काम करता है। यह एक उच्च शक्ति ऊर्जा स्रोत का उपयोग करता है, जैसे लेजर, प्लाज्मा या इलेक्ट्रॉन बीम, जो टाइटेनियम के तार को पिघला देता है। इससे टुकड़े बनाना संभव होता है जो डिजिटल मॉडल से सीधे सात मीटर तक लंबे हो सकते हैं, अंतिम ज्यामिति के बहुत करीब।

वायर-डीईडी विधि के प्रमुख लाभ:
सीएनसी मशीनिंग, जो पहले कार्यशाला पर हावी थी, अब एक मशीन के साथ जगह साझा करती है जो मूल रूप से पिघली धातु से चित्र बनाती है।

ए350 जैसे विमानों में कार्यान्वयन

यह तकनीक अब प्रोटोटाइप नहीं है। एयरबस ने सफलतापूर्वक वायर-डीईडी से बने टुकड़ों को सेवा में मौजूद विमानों में एकीकृत किया है। एक ठोस उदाहरण ए350 मॉडल के कार्गो डोर फ्रेम हैं। ये घटक अभी भी अंतिम मशीनिंग चरण और प्रमाणीकरण के लिए कठोर प्रक्रिया से गुजरते हैं, लेकिन उनका उपयोग तकनीक की वास्तविक वातावरण में व्यवहार्यता प्रदर्शित करता है।

अगले कदम और विस्तार:

एयरोस्पेस उद्योग को बदलना

यह विकास बड़े संरचनात्मक भागों के उत्पादन में गहरा परिवर्तन दर्शाता है। केवल आवश्यक स्थान पर सामग्री जमा करके, पारंपरिक विधियों से मेल नहीं खाने वाली दक्षता प्राप्त होती है। यह लागत और समय पर सीधा प्रभाव डालता है, लेकिन साथ ही दरवाजा खोलता है घटकों को डिजाइन करने के तरीके को फिर से发明 करने के लिए। निकट भविष्य में यह तकनीक और अधिक प्रमुखता प्राप्त करेगी, शाब्दिक रूप से लाइन दर लाइन, विमानन क्रांति का निर्माण करेगी। ⚙️